छठ पूजा 2026: आस्था और प्रकृति का महापर्व
तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और पूर्ण जानकारी
छठ पूजा 2026: तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
छठ पूजा, उत्तर भारत का एक प्रमुख लोकपर्व, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जो दीपावली के छह दिन बाद आता है। वर्ष 2026 में छठ पूजा 15 नवंबर (रविवार) को मनाई जाएगी। यह चार दिवसीय उत्सव कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी पर समाप्त होता है। बिहार, झारखंड, और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, और अब यह देश के अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय हो रहा है। इस लेख में हम छठ पूजा 2026 की तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि, और इसके धार्मिक, सांस्कृतिक, और वैज्ञानिक महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।
17:27 (सूर्यास्त)
06:44 (सूर्योदय)
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जो धार्मिक, सांस्कृतिक, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अद्वितीय है। यह पर्व सूर्य देव की उपासना का प्रतीक है, जिन्हें हिंदू धर्म में प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। सूर्य पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं और उनकी किरणें स्वास्थ्य, ऊर्जा, और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, पिता, और मान-सम्मान का कारक माना गया है। इसके साथ ही, छठी मैया, जिन्हें षष्ठी देवी या माँ कात्यायनी के रूप में भी जाना जाता है, संतानों की रक्षा और दीर्घायु प्रदान करती हैं।
सांस्कृतिक रूप से, छठ पूजा सादगी, पवित्रता, और प्रकृति के प्रति प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है, क्योंकि इसमें सभी वर्गों के लोग एक साथ नदी किनारे पूजा करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, कार्तिक मास में सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर अधिक मात्रा में पहुंचती हैं। सूर्य को अर्घ्य देने से इन किरणों का हानिकारक प्रभाव कम होता है, और यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
चार दिवसीय महापर्व के चरण
पहला दिन: नहाय खाय
यह छठ पूजा का पहला दिन है, जो कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन व्रति (व्रत रखने वाला व्यक्ति) स्नान करता है और घर की साफ-सफाई करता है। शाकाहारी भोजन तैयार किया जाता है, जिसमें चावल, दाल, और कद्दू की सब्जी शामिल होती है। यह दिन मन और शरीर को शुद्ध करने के लिए समर्पित है।
दूसरा दिन: खरना
खरना, छठ पूजा का दूसरा दिन है, जो कार्तिक शुक्ल पंचमी को होता है। इस दिन व्रति पूरे दिन निर्जला उपवास रखता है। संध्या के समय गुड़ की खीर, रोटी, और फल तैयार किए जाते हैं। व्रति इस प्रसाद को ग्रहण करता है और इसे परिवार व अन्य लोगों में बांटता है। यह अनुष्ठान व्रत की कठिनाई को और बढ़ाता है।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन व्रति बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, चावल के लड्डू, और अन्य प्रसाद सजाते हैं। सूर्यास्त के समय नदी या जलाशय के किनारे सूर्य देव को जल और दूध चढ़ाकर अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद छठी मैया की पूजा की जाती है, और रात में छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।
चौथा दिन: उषा अर्घ्य
यह छठ पूजा का अंतिम दिन है, जो कार्तिक शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता है। व्रति सूर्योदय से पहले नदी किनारे पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके बाद छठी मैया से संतान और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। व्रत का समापन कच्चे दूध का शरबत और प्रसाद ग्रहण करके होता है, जिसे पारण कहते हैं।
छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व
छठ पूजा का वैज्ञानिक आधार भी है। कार्तिक मास में सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है, जिसके कारण पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर अधिक मात्रा में पहुंचती हैं। ये किरणें त्वचा और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। सूर्य को अर्घ्य देने से इन किरणों का हानिकारक प्रभाव कम होता है, और सूर्य की ऊर्जा शरीर को लाभ पहुंचाती है।
छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जो आस्था, प्रकृति, और विज्ञान का अनूठा संगम है। यह पर्व न केवल धार्मिक विश्वासों को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक एकता और स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है।
छठ पूजा की पौराणिक कथा
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, प्रथम मनु स्वायम्भुव के पुत्र राजा प्रियव्रत को संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप के सुझाव पर उन्होंने यज्ञ करवाया, जिसके बाद उनकी पत्नी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। दुखी राजा के सामने माता षष्ठी प्रकट हुईं और उन्होंने शिशु को जीवित कर दिया। माता ने बताया कि वह ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं और संतानों की रक्षा करती हैं। इसके बाद राजा ने छठी मैया की पूजा शुरू की, और यह परंपरा धीरे-धीरे फैल गई।
अर्घ्य देने की विधि:
- बांस की टोकरी में सभी सामग्री और प्रसाद सजाएं।
- सूप में दीपक जलाएं और प्रसाद रखें।
- नदी में उतरकर सूर्य देव को जल और दूध चढ़ाएं।
- छठी मैया की पूजा करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
छठ पूजा की विधि
- बांस की टोकरी, सूप, थाली, दूध, और ग्लास
- चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, और शकरकंदी
- नाशपाती, नींबू, शहद, पान, सुपारी, कपूर, चंदन, और मिठाई
- प्रसाद के लिए ठेकुआ, मालपुआ, खीर, और चावल के लड्डू
ठेकुआ गेहूं के आटे और गुड़ से बना छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण और पारंपरिक महाप्रसाद है।
lordkart की ओर से आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं!