Vasant Panchami 2027 date

वसंत पंचमी 2027 में कब है? जानिए तिथि, महत्व और पूजा विधि

🌸 ॐ 🌸

वसंत पंचमी 2027: बसंत ऋतु का स्वागत और ज्ञान की देवी की आराधना

गुरुवार, 11 फरवरी 2027

वसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो बसंत ऋतु के आगमन की सूचना देता है। इस दिन प्रकृति नए रंगों से सजती है, सरसों के खेत पीले फूलों से भर जाते हैं और हवा में मिठास घुल जाती है। यह पर्व मां सरस्वती की पूजा के लिए विशेष रूप से जाना जाता है, जो ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी हैं। बच्चे इस दिन विद्या आरंभ करते हैं और बड़े-बूढ़े ज्ञान की प्राप्ति की कामना करते हैं।

2027 में वसंत पंचमी गुरुवार, 11 फरवरी को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 11 फरवरी को सुबह 3:04 बजे शुरू होगी और 12 फरवरी को सुबह 3:18 बजे समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त पूर्वाह्न काल में रहेगा, जो सुबह लगभग 7:03 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक होगा। इस समय में सरस्वती पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है।

यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि मौसमी परिवर्तन का भी प्रतीक है। सर्दी के अंत और बसंत के स्वागत का यह त्योहार लोगों को नई उम्मीद और उत्साह से भर देता है।

शुभ मुहूर्त

पंचमी तिथि: 11 फरवरी, सुबह 3:04 बजे - 12 फरवरी, सुबह 3:18 बजे
पूजा मुहूर्त: सुबह 7:03 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक

वसंत पंचमी का महत्व

वसंत पंचमी को श्रीपंचमी या सरस्वती पंचमी भी कहा जाता है। पीला रंग इस पर्व का मुख्य रंग है, क्योंकि यह सरसों के फूलों, बसंत की ऊर्जा और मां सरस्वती के प्रिय रंग का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले फूल चढ़ाना और पीले भोजन बनाना शुभ माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से यह दिन ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती के आविर्भाव से जुड़ा है। मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और घरों में उनकी विशेष पूजा होती है। बच्चे इस दिन पहली बार अक्षर लेखन शुरू करते हैं, जिसे विद्या आरंभ या अक्षर अभ्यास कहते हैं।

बसंत पंचमी होली की तैयारियों की शुरुआत भी मानी जाती है, क्योंकि होली इससे ठीक 40 दिन बाद आती है। पंजाब और हरियाणा में इस दिन पतंगबाजी का भी चलन है, जो खुशी और उत्साह का प्रतीक है।

पौराणिक कथाएं

वसंत पंचमी से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। एक प्रमुख कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, लेकिन उन्हें लगा कि कुछ कमी रह गई है। तब उन्होंने विष्णु जी की आज्ञा से कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक देवी प्रकट हुईं। उनके हाथ में वीणा थी। जैसे ही उन्होंने वीणा बजाई, संसार में ध्वनि पैदा हुई और सभी जीव-जंतु बोलने लगे। इन देवी का नाम सरस्वती पड़ा।

एक अन्य कथा में कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सरस्वती को वरदान दिया था कि माघ शुक्ल पंचमी को तुम्हारी विशेष पूजा होगी। इसी दिन से वसंत पंचमी का महत्व बढ़ गया।

कामदेव और रति की कथा भी इससे जुड़ी है। मान्यता है कि इस दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था, इसलिए यह पर्व प्रेम और सौंदर्य का भी प्रतीक है।

प्राचीन ग्रंथों में वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा गया है। ऋग्वेद और अन्य वेदों में भी बसंत का वर्णन मिलता है।

शिक्षा और विद्या आरंभ

वसंत पंचमी शिक्षा जगत के लिए विशेष दिन है। स्कूलों में सरस्वती पूजा आयोजित की जाती है। छोटे बच्चे इस दिन पहली बार "ॐ" या अक्षर लिखते हैं।

मान्यता है कि इस दिन शुरू की गई शिक्षा में कभी बाधा नहीं आती। कलाकार, संगीतकार और लेखक भी इस दिन अपनी कला सामग्री की पूजा करते हैं।

पूजा विधि

1
स्नान और वस्त्र: सुबह स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थल को साफ करें और मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
2
प्रतिमा स्थापना: प्रतिमा को पीले वस्त्र पहनाएं और पीले फूलों (गेंदा, सरसों के फूल) से सजाएं। पीले चंदन, अक्षत और दूर्वा अर्पित करें।
3
मंत्र जाप: "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" या सरस्वती वंदना "या कुंदेंदु तुषारहार धवला..." का जाप करें। धूप-दीप जलाएं।
4
भोग और आरती: केसर युक्त हलवा, मीठे चावल, बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
5
विद्या आरंभ: बच्चों के लिए किताबें और कलम पूजा के सामने रखें और विद्या आरंभ करें। पहली बार अक्षर लिखने का शुभ समय।

विभिन्न क्षेत्रों में उत्सव

  • पश्चिम बंगाल: सरस्वती पूजा के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। कॉलेजों और स्कूलों में पंडाल सजाए जाते हैं।
  • पंजाब और हरियाणा: पतंग उड़ाने की परंपरा है। सरसों के खेतों में पिकनिक मनाई जाती है।
  • बिहार और उत्तर प्रदेश: घरों और स्कूलों में सरस्वती पूजा होती है। बच्चे अक्षर लेखन शुरू करते हैं।
  • राजस्थान: पीला रंग प्रमुख है और मिठाइयां बांटी जाती हैं।
  • दक्षिण भारत: श्रीपंचमी के नाम से मनाया जाता है। कुछ जगहों पर कामदेव की पूजा भी होती है।

पारंपरिक भोजन और प्रसाद

इस दिन पीले रंग के भोजन का विशेष महत्व है:

  • केसरिया हलवा
  • केसर भात (मीठे चावल)
  • बूंदी के लड्डू
  • राजभोग
  • सरसों के साग और मक्के की रोटी
  • पीली खिचड़ी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वसंत पंचमी 2027 में कब है?
2027 में वसंत पंचमी गुरुवार, 11 फरवरी को है।
वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा मुहूर्त सुबह 7:03 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक है (दिल्ली के अनुसार)।
वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत ऋतु के स्वागत और मां सरस्वती (ज्ञान की देवी) की पूजा के लिए।
पीला रंग क्यों पहना जाता है?
पीला रंग सरसों के फूलों और बसंत की ऊर्जा का प्रतीक है तथा मां सरस्वती को प्रिय है।
बच्चों के लिए इस दिन का क्या महत्व है?
इस दिन विद्या आरंभ या अक्षर अभ्यास किया जाता है। यह शिक्षा शुरू करने का शुभ दिन माना जाता है।
वसंत पंचमी पर कौन से मंत्र का जाप करें?
"ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" या सरस्वती वंदना "या कुंदेंदु तुषारहार धवला..." का जाप करें।
क्या दान करना शुभ है?
किताबें, कलम, पीले वस्त्र या भोजन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
वसंत पंचमी होली से कैसे जुड़ी है?
यह होली की तैयारियों की शुरुआत मानी जाती है, क्योंकि होली 40 दिन बाद आती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि विभिन्न पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है। सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंडित या विश्वसनीय पंचांग का परामर्श अवश्य लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की त्रुटि या उसके परिणामों के लिए जिम्मेदार नहीं है।
🙏 जय माँ सरस्वती 🙏